Sunday, 12 July 2026

शायरी : क़िस्त 004

शायरी : क़िस्त 004

एक शे’र है--

 रंग लाती है हिना पत्थर पे पिस जाने के बाद

सुर्ख़-रू होता है इन्साँ ठोकरे खाने के बाद ।

-नासिख़-

ऐसे ही मशहूर-ओ-मा’रूफ़ अश’आर आप यहाँ सुन सकते हैं-


Visit my Youtube channel

www.youtube.com/@33akp

-आनन्द.पाठक ’आनन’-

880092 7181

No comments:

Post a Comment

शायरी : क़िस्त 006

शायरी : क़िस्त 006 एक शे’र है जो इक्तिदार की कुर्सी पे जल्वा फ़रमा हैं न जाने क्यों उन्हें ऊँचा सुनाई देता है । -सुरेश चन्द्र ’शौक़ ’ [इक्तिदार...