Tuesday, 14 July 2026

शायरी : क़िस्त 006

शायरी : क़िस्त 006

एक शे’र है

जो इक्तिदार की कुर्सी पे जल्वा फ़रमा हैं

न जाने क्यों उन्हें ऊँचा सुनाई देता है ।

-सुरेश चन्द्र ’शौक़

[इक्तिदार = हुकूमत]

ऐसे ही अन्य  मारूफ़ और मशहूर अश’आर यहाँ सुनें--


-आनन्द पठक ’आनन’ -
880092 7181

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