शायरी : क़िस्त 006
एक शे’र है
जो इक्तिदार की कुर्सी पे जल्वा फ़रमा हैं
न जाने क्यों उन्हें ऊँचा सुनाई देता है ।
-सुरेश चन्द्र ’शौक़’
[इक्तिदार = हुकूमत]
शायरी : क़िस्त 006 एक शे’र है जो इक्तिदार की कुर्सी पे जल्वा फ़रमा हैं न जाने क्यों उन्हें ऊँचा सुनाई देता है । -सुरेश चन्द्र ’शौक़ ’ [इक्तिदार...
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