शायरी : क़िस्त 005
एक शे’र है--
न जाना कि दुनिया से जाता है कोई
बहुत देर की मेहरबाँ आते आते ।
-दाग़ देहलवी-
ऐसे है और भी मशहूर-0-मा’रूफ़ अश’आर आप यहाँ सुन सकते हैं--
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-आनन्द.पाठक ’आनन’-
880092 7181
शायरी : क़िस्त 006 एक शे’र है जो इक्तिदार की कुर्सी पे जल्वा फ़रमा हैं न जाने क्यों उन्हें ऊँचा सुनाई देता है । -सुरेश चन्द्र ’शौक़ ’ [इक्तिदार...
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