Sunday, 12 July 2026

शायरी : क़िस्त 005

 शायरी : क़िस्त 005

एक शे’र है--

न जाना कि दुनिया से जाता है कोई

बहुत देर की मेहरबाँ आते आते ।

-दाग़  देहलवी-

ऐसे है और भी मशहूर-0-मा’रूफ़ अश’आर आप यहाँ सुन सकते हैं--


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-आनन्द.पाठक ’आनन’-

880092 7181

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